मेदाराम जतारा का बुग्यका बज रहा है, जहां एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी उत्सव सम्मक्का सरक्का जतारा बुधवार से धूमधाम से शुरू होगा। मुलुगु जिले के इस चार दिवसीय मेले में 20 मिलियन से ज्यादा श्रद्धालुओं का आगमन अपेक्षित है।
गोदावरी के किनारे बसे मेदाराम में हैदराबाद से 240 किमी की दूरी तय कर लाखों भक्त पहुंचेंगे। तेलंगाना का यह कुंभ आदिवासी परंपराओं का जीवंत प्रतीक है, जहां कई राज्यों के लोग एकत्रित होंगे।
251 करोड़ की सरकारी परियोजना से मेदाराम अब आधुनिक सुविधाओं से लैस है। पहले ही 10 लाख भक्त पूजा कर चुके।
12वीं सदी की लोककथा में सम्मक्का-सारक्का ने काकतीय शासकों के टैक्स के विरुद्ध विद्रोह किया। सूखे में मेदाराम रॉयल्टी न दे पाए तो आक्रमण हुआ, जिसमें सभी शहीद हुए। सम्मक्का का सिंदूर बांस नीचे प्रकट हुआ।
दो वर्षांतर पुजारी जंगल से प्रतीक लाते हैं—सम्मक्का का बांस-सिंदूर, सरक्का कन्नेपल्ली से। एल्म वृक्ष तले जतारा आरंभ, बाद जंगल वापसी।
गुड़ वजनानुसार, लाल वस्त्र, मसाले चढ़ावे। जम्पनना धारा स्नान से पवित्रता। सम्मक्का पुत्र जम्पनना की याद।
सुरक्षा चाक चौबंद: 13,000 पुलिस, एआई ड्रोन, कंट्रोल रूम। 42,000 अधिकारी, स्वयंसेवक भक्तसेवा में लगे। यह सांस्कृतिक महाकुंभ आदिवासी गौरव गाएगा।