नेट-जीरो की राह पर भारत को अपनी उछाल मारती अर्थव्यवस्था के साथ तालमेल बिठाने के लिए प्रतिवर्ष 145 अरब डॉलर निवेश की आवश्यकता है। फोकस बिजली उत्पादन, स्टोरेज और ग्रिड आधुनिकीकरण पर रहेगा।
वुड मैकेंजी की मंगलवार जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक 1.5 अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य प्राप्ति की कगार पर है। कोयला गैसीकरण से ऊर्जा स्रोतों में विविधता आ रही है।
प्राकृतिक गैस मांग 2024 के 72 अरब क्यूबिक मीटर से 2050 तक 140 अरब से अधिक पहुंचेगी। उद्योग 65 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देंगे, जो लंबे समय तक बरकरार रहेगा।
विकास और पर्यावरण लक्ष्यों में अंतर तो है, मगर भारत सोलर-बैटरी क्षेत्र में चीन का वैकल्पिक केंद्र बनने को तैयार है। मजबूत उत्पादन इकोसिस्टम वैश्विक लाभ दिलाएगा।
जोशुआ न्गू ने चेताया, “तत्काल ऊर्जा सुरक्षा और लो-कार्बन ढांचा आवश्यक है।”
राशिका गुप्ता ने 2026-35 के 1.5 ट्रिलियन डॉलर निवेश पर कहा, “यह नई क्षमता के साथ वितरण नेटवर्क को सशक्त करेगा।” इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल से प्रतिस्पर्धा और निवेश बढ़ेगा।
तेल निर्भरता 2035 में 87 प्रतिशत हो सकती है। स्वदेशी उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय निवेश पर बल।
रिपोर्ट भारत को ऊर्जा संक्रमण में नेतृत्व की दिशा दिखाती है।