गणतंत्र दिवस से ठीक पहले 2026 पद्म पुरस्कारों का ऐलान। विभिन्न क्षेत्रों के योगदानकर्ताओं में गुजरात के जूनागढ़ से मीर हाजीभाई कासमभाई का नाम चमका। कला में पद्मश्री पाकर 80 वर्षीय ढोलक उस्ताद गदगद।
60 वर्षों से उनकी तालें देश-दुनिया झुमाती रहीं। लोक संगीत को अंतरराष्ट्रीय ऊंचाइयों पर ले जाकर गुजरात की कला को नई पहचान दी।
बातचीत में उन्होंने कहा, ‘पद्मश्री से सपना पूरा। गुरुओं व जूनागढ़ को अर्पण। पीएम मोदी का गुजरात सीएम काल से प्रोत्साहन—हार्दिक धन्यवाद। शहर गर्व से चमक रहा।’
घर में खुशी की लहर, बधाई संदेशों की बौछार। पद्म सम्मान—विभूषण, भूषण, श्री—असाधारण सेवाओं के लिए। कला, विज्ञान, खेल आदि में मिलते हैं। प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस पर घोषणा।
यह पुरस्कार लोक परंपराओं के संरक्षण की मिसाल। आने वाली पीढ़ियों को दिशा देगा।