पद्मश्री से नवाजे गए प्रोफेसर महेंद्र नाथ रॉय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने उनके गुमनाम सेवाकार्यों को पहचान दिया। कोलकाता के यह समाजसेवी और केमिस्ट्री विशेषज्ञ उत्तर बंगाल के गौरव हैं।
पुरस्कार घोषणा पर प्रो. रॉय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘अपार खुशी हो रही है। माता-पिता व गुरुओं को धन्यवाद। किसान परिवार से होते हुए ऐसी ख्याति की आशा न थी। मेरी शांत कोशिशों पर देश का विश्वास जीतना सबसे बड़ा सम्मान है।’
नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन व अलीपुरद्वार यूनिवर्सिटी के प्रथम वीसी प्रो. रॉय ने कठिनाइयों का डटकर मुकाबला किया। आर्थिक संकट, सामाजिक रुकावटें व व्यक्तिगत विपत्तियां आईं, पर लोगों की भलाई की चाह ने उन्हें थमने न दिया।
45 अनसुने नायकों को पद्म पुरस्कार देने के सरकारी कदम पर उन्होंने कहा, ‘यह केवल मेरा नहीं, बल्कि उन अनगिनत सेवकों का मान है जो पर्दे के पीछे कार्यरत हैं। यह योजना सच्चे परिवर्तनकर्ताओं को सम्मानित करती है।’
राज्य से अन्य सम्मानितों में साहित्यकार रबीलाल टुडू, चिकित्सक सरोज मंडल, कलाकार तरुण भट्टाचार्य व तृप्ति मुखर्जी प्रमुख हैं। प्रो. रॉय का यह पुरस्कार बंगाल की विविध प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पटल पर चमकाता है तथा समर्पित जीवन की प्रेरणा देता है।