मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में नर्मदा जयंती का उमंगमय आयोजन रविवार को हुआ। पवित्र नर्मदा नदी के किनारे सतधारा समेत सभी घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी संख्या रही। यह नदी प्रदेश की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की रीढ़ है, जो उर्वरक भूमि प्रदान करती है और आस्था का प्रतीक बनी हुई है। भक्तों ने यात्राओं के माध्यम से मां का दर्शन किया।
गणतंत्र दिवस के समन्वय में बच्चों ने तिरंगा चादरें चढ़ाईं, जो देशप्रेम और भक्ति का प्रतीक बना। उत्सव ने पर्यावरण जागरूकता पर जोर दिया। सभी ने प्रतिज्ञा ली कि नर्मदा के घाट और जल को स्वच्छ बनाए रखेंगे, क्योंकि यही सच्ची आराधना है।
सिवनी के लखनादौन से गोलू कुशवाहा जैसे भक्त पैदल चलकर पहुंचे। वर्षों से नियमित आने वाले गोलू बोले, मां भक्तों की मनोकामनाएं पूर्व ही पूरी कर देती हैं। भीड़ इतनी थी कि ग्रामीण मार्ग वीरान हो गए।
शिवानी विश्वकर्मा ने प्लास्टिक कचरे के खिलाफ अभियान चलाया। उन्होंने कहा, कचरा फेंकना श्रद्धा के विरुद्ध है। भगवान उपाध्याय ने भक्ति भजनों से प्रेरित कर अपील की कि नारियल फोड़ना या स्नान से अधिक महत्वपूर्ण है घाट की स्वच्छता। हर व्यक्ति संकल्प लें कि कचरा साथ ले जाएंगे।
यह जयंती आस्था और दायित्व का अनुपम उदाहरण बनी। भक्त लौटे तो मन में स्वच्छ नर्मदा की छवि लेकर, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहेगी।