बिहार में राजनीतिक भूचाल आ गया है। आरजेडी ने तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद सौंपा, तो भाजपा-जदयू ने इसे परिवारवाद का चरम बताया। रोहिणी आचार्य का एक्स पोस्ट इस कलह को और उजागर कर रहा है।
शाहनवाज हुसैन ने तीखे लहजे में कहा कि लालू जी का दौर सामाजिक न्याय पर टिका था, तेजस्वी मात्र वारिस हैं। यह नियुक्ति मां-बाप के आग्रह से हुई है, जिससे पार्टी में विद्रोह के स्वर तेज हो गए।
उन्होंने रोहिणी के पोस्ट को आंतरिक फूट का सबूत माना, जहां कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। चुनावी हार के बावजूद इनाम मिलना गलत है, उन्होंने चेतावनी दी कि तेजस्वी आरजेडी के आखिरी नेता सिद्ध होंगे।
नीरज कुमार ने कहा कि रोहिणी ने पिता को ही ‘अमान्य’ ठहरा दिया। आरजेडी अब पुरानी हो चुकी है और तेजस्वी का नेतृत्व न जनता मान रही, न कार्यकर्ता।
पूरे घटनाक्रम से साफ है कि आरजेडी संकट में घिर चुकी है, जिसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ेगा।