हिंदी सिनेमा की अमर कृति ‘शोले’ ने 50 बसंत देखे। 1975 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाई।
हेमा मालिनी ने अपने आवास पर रमेश सिप्पी के साथ जयंती मनी। उन्होंने विशेष पत्रिका का लोकार्पण किया। हेमा ने मजेदार कथा सुनाई – शोले के पात्र आज के गांव में। ‘धर्म जी पति, अमित जी ठाकुर, गब्बर समोसा विक्रेता। मैं सबकी रसोइया।’ प्रशंसकों की यह कल्पना शानदार लगी।
सिप्पी ने खुलासा किया, बसंती के लिए हेमा से पूछने में संकोच हुआ। लेकिन उन्होंने तुरंत स्वीकार किया। डायलॉगों की धाराप्रवाह अभिव्यक्ति ने टीम को प्रभावित किया।
गाने ‘जब तक है जान’ की चर्चा में हेमा ने बताया, तपती धूप में बिना जूतों के डांस कष्टदायक था। मां विपक्ष में थीं, पर हेमा ने समर्पण दिखाया।
ये संस्मरण ‘शोले’ को जीवंत रखते हैं, जो पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।