‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के चंदनकी गांव की विशेषता बयां की, जहां घरों में खाना बनाना बंद हो चुका है। बेचराजी क्षेत्र का यह गांव सामूहिक रसोई पर चलता है, जो सभी के लिए भोजन तैयार करती है और सब एक साथ खाते हैं।
देश को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि भारत की विविधता में छिपी हैं ऐसी अद्भुत बातें, जो हमारी एकता की प्रतीक हैं। ये सादगीपूर्ण रीति-रिवाज समाज को मजबूत बनाते हैं, भले ही वे सुर्खियों से दूर रहें।
15 बरसों से यह सिलसिला जारी है। गांववासी, खासकर वृद्धजन, इसकी बदौलत चैन की सांस लेते हैं। रसोईघर सामाजिक मेलजोल का केंद्र है, जहां भोजन बनने से लेकर बंटने तक सब कुछ साझा होता है।
बीमारों के लिए होम डिलीवरी सेवा उपलब्ध है, जो जरूरतमंदों तक गर्म भोजन पहुंचाती है। मोदी ने इसे मानवीयता और सहयोग की मिसाल करार दिया। यहां न सिर्फ रोटी, बल्कि दिल भी जुड़ते हैं।
ऐसी पहलें हमारी जीवनशैली का अभिन्न अंग हैं। पीएम ने जोर देकर कहा कि इन्हें संरक्षित रखें, ताकि आने वाली पीढ़ियां हमारी सांस्कृतिक विरासत से परिचित हों और समाज सुखी बने।