गणतंत्र दिवस की भव्य परेड में गृह मंत्रालय एक ऐसी झांकी लेकर आ रहा है, जो नए आपराधिक कानूनों के माध्यम से भारत की न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण को जीवंत रूप देगी। तकनीक और कानून का अनूठा संगम इस झांकी का मुख्य आकर्षण होगा।
भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम—ये तीनों कानून 1 जुलाई 2024 से देश में अमल में हैं। इन्होंने सदी पुराने ब्रिटिश कानूनों की जगह ली है और न्याय को भारतीय मूल्यों से जोड़ा है।
झांकी में ई-साक्ष्य संग्रह, एनएएफआईएस बायोमेट्रिक्स, ई-समन, वर्चुअल कोर्ट जैसी डिजिटल प्रक्रियाएं प्रदर्शित होंगी। अपराध जांच से सजा तक सभी इकाइयों का एकीकृत नेटवर्क दिखाया जाएगा।
अपराध स्थल पर पहुंचने वाली मोबाइल फोरेंसिक इकाइयां, सीसीटीवी से जुड़े कंट्रोल रूम और क्षेत्र में तैनात महिला पुलिस टीमें तेज कार्रवाई का उदाहरण पेश करेंगी। सामुदायिक सेवा जैसी मानवीय सजाएं सुधार पर फोकस को रेखांकित करेंगी।
कई भाषाओं में उपलब्ध कानून किताबें पारदर्शिता और पहुंच सुनिश्चित करती हैं। गणतंत्र दिवस पर यह झांकी देशवासियों को नई न्याय व्यवस्था की ताकत से रूबरू कराएगी और भविष्य की दिशा तय करेगी।