बीजापुर जिले में इंद्रावती नदी की गोद में एक परिवार का सफाया हो गया। लकड़ी की नाव पलटने से चार जिंदगियां छिन गईं। घने जंगलों और नक्सली इलाके में चली खोज शनिवार को संपन्न हुई जब अंतिम शव बरामद हो गया।
70 वर्षीय भादो का शव हादसे से एक किमी दूर घनी झाड़ियों में फंसकर मिला। बुधवार को 25 साल की सुनीता कवासी 500 मीटर नीचे तैरती मिली। पोडिया (45) और उनके दो वर्षीय पुत्र राकेश तौलिए से बंधे थे, जो मां की बेबसी दर्शाता है।
शिकार हुए पोडिया, राकेश, सुनीता कवासी व भादो। तौलिये का बंधन मां-बेटे की अंतिम जद्दोजहद की गवाही देता है।
परिवार प्रमुख सन्नू आंध्र प्रदेश में कामधंधे पर हैं, संपर्क टूटा हुआ है। नेटवर्क की कमी से दुखद सूचना पहुंचाना मुश्किल।
उस्परी हाट से वापसी में तेज धारा ने नाव उलट दी। दर्जन यात्रियों वाली नाव में चार बह गए। पुल-राह न होने से नाव ही एकमात्र सहारा, जो घातक साबित हुआ।
बुजुर्गों के अनुसार नदी बरसात बाद उफनकर खतरनाक हो जाती है। नक्सलवाद विरोधी कदमों से शिविर बने, मगर विकास कार्य ठप। आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी ऐसी घटनाओं को न्योता दे रही है। सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।