नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रंथ कुटीर को राष्ट्रपति भवन में जनता के लिए खोल दिया। 11 शास्त्रीय भाषाओं में 2300 से अधिक पुस्तकों का यह संग्रह तमिल से बंगाली तक फैला है, जिसमें हाल ही में मान्यता प्राप्त मराठी आदि शामिल हैं।
साहित्य, दर्शन, विज्ञान और शासन पर आधारित ये रचनाएं हमारी बौद्धिक परंपरा को प्रतिबिंबित करती हैं। संविधान की प्रतियां और 50 पांडुलिपियां इसकी शान हैं, जो प्राचीन सामग्रियों पर लिखी गईं।
बहुस्तरीय सहयोग से विकसित यह कुटीर मंत्रालयों और कला केंद्र के नेतृत्व में फला-फूला। इसका लक्ष्य सांस्कृतिक जागरण, एकता का बोध और डिजिटलीकरण है।
औपनिवेशिक अवशेष हटाए गए, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंचाए गए। दर्शनार्थी सर्किट-1 में झलक पाएं, ऑनलाइन पढ़ें, आवेदन कर प्रवेश लें।
वेद, उपनिषद, महाभारत, कविराजमार्ग जैसे ग्रंथ विविधता दर्शाते हैं।
राष्ट्रपति ने जोर दिया, ‘शास्त्रीय भाषाओं ने विश्व को दिशा दी। इनका ज्ञान अतीत से भविष्य रचता है।’ विश्वविद्यालयों में अध्ययन, पुस्तकालयों में वृद्धि और युवा भागीदारी पर बल देते हुए उन्होंने कुटीर को प्रेरणा स्रोत बताया, जो लगातार समृद्ध होगा।