दिल्ली की अहम कांग्रेस बैठक से दूरी बनाने वाले शशि थरूर ने शनिवार को कोझिकोड से सियासी कयासों को विराम दिया। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि हाईकमान को उनकी अनुपस्थिति की पूरी जानकारी पहले से थी और इसमें कोई छिपा राजनीतिक संदेश नहीं है। थरूर ने आंतरिक संवादों पर भरोसा जताते हुए सार्वजनिक बयानबाजी से परहेज की बात कही।
पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा शुक्रवार को बुलाई गई बैठक विधानसभा चुनाव准备 पर केंद्रित थी। थरूर की गैरमौजूदगी ने तूल पकड़ा जब मीडिया ने इसे कोच्चि बैठक से जोड़ा, जहां राहुल गांधी की मौजूदगी में कथित असंतोष की चर्चा हुई। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि थरूर वहां हुए व्यवहार से आहत थे।
प्रेस से रूबरू होते हुए थरूर बोले, ‘पार्टी नेताओं से जो बातें करनी थीं, अंदर ही हो गईं। बाहर लाना ठीक नहीं।’ कोझिकोड लिटररी फेस्ट में नई पुस्तक प्रमोशन को प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के चलते दिल्ली यात्रा असंभव थी। ‘जयपुर साहित्य उत्सव छूट चुका, अब यह मौका नहीं हाथ से जाता,’ उन्होंने हल्के हास्य के साथ जोड़ा।
मीडिया अफवाहों को खारिज करते हुए थरूर ने हर खबर पर यकीन न करने की हिदायत दी। समर्थन में रमेश चेन्निथला ने कहा कि थरूर का साहित्यिक व्यक्तित्व उनकी राजनीतिक भूमिका से इतर महत्वपूर्ण है, इसलिए उनकी प्राथमिकताओं को समझा जाए।
चुनावी माहौल में यह स्पष्टीकरण केरल कांग्रेस की एकता को मजबूती देता नजर आता है। थरूर की दोहरी पहचान राजनीतिक बहसों को नई दिशा दे रही है, जो पार्टी की छवि को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। भविष्य की रणनीतियां अब फोकस में होंगी।