बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने शनिवार को एक्स पर धर्म के क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप को समाज के लिए घातक बताते हुए चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में पर्व-त्योहारों, पूजापाठ और स्नान जैसे आस्था के केंद्रों पर राजनेताओं का प्रभाव बढ़ने से विवाद, तनाव और संघर्ष उभर रहे हैं।
यह स्थिति स्वीकार्य नहीं। प्रयागराज माघ मेले का मौनी अमावस्या विवाद इसका जीता-जागता प्रमाण है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी से स्नान को जा रहे थे, पुलिस ने रोका और पैदल चलने को विवश किया। शिष्यों संग झड़प हुई, शंकराचार्य धरने पर उतर आए।
प्रशासन ने फौरन दो नोटिस ठोक दिए—पदवी के इस्तेमाल और हंगामे पर। मेला क्षेत्र से प्रतिबंध की धमकी दी। जवाब मिलने के बाद भी राजनीतिक दलों ने इसे तूल दे दिया।
मायावती ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि राजनीति को धर्म से अलग रखना ही राष्ट्रीय कर्तव्य है। बिना द्वेष के सर्वहितकारी कार्य ही सच्चा धर्म। प्रयागराज विवाद शीघ्र सहमति से निपटे। उत्तर प्रदेश दिवस की बधाई देते हुए उन्होंने निष्पक्ष शासन की मांग की। समाज हित में यह दूरी अनिवार्य है।