भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने नई दिल्ली में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कांग्रेस और टीएमसी को कटघरे में खड़ा कर दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि नेताजी के बलिदान को भुलाने की अनेक कोशिशें हुईं, लेकिन उनका योगदान अविस्मरणीय है।
ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए बोले, ‘कांग्रेस से उपजी आपकी पार्टी ने नेताजी को अब तक क्यों नहीं पहचाना? सम्मान है तो नाम बदलो, नहीं तो बंगाल की प्रबुद्धता आपको मिटा देगी।’
मोदी सरकार के सम्मान का जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने आजाद हिंद सेना के योद्धाओं को 2018 की परेड में बुलाने और इंडिया गेट पर मूर्ति स्थापना का उल्लेख किया। नेहरू की शपथ ब्रिटिश प्रभाव वाली थी, नेताजी का स्वतंत्र भारत का पहला प्रतीक।
अंबेडकर के साक्षात्कार से तथ्य दिए कि नेताजी ने सैनिकों की निष्ठा तोड़ी। 1939 में युद्ध को अवसर मानने वाले नेताजी के विपरीत कांग्रेस ने तीन साल इंतजार किया। 1942 रेजोल्यूशन में ब्रिटिश फौज का समर्थन किया। 1931-47 में आंदोलनहीनता का कारण यही।
त्रिवेदी का यह बयान राजनीतिक दलों के बीच विरासत की लड़ाई को तेज करता है, भाजपा को इतिहास का रक्षक बनाता है।