सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर देश पराक्रम दिवस मना रहा है। इस मौके पर मोदी आर्काइव द्वारा जारी 1997 के वीडियो में नरेंद्र मोदी के प्रेरक शब्द सामने आए हैं, जो बताते हैं कि राष्ट्रीय नायकों को जन-चेतना में क्यों अमर रखना जरूरी है।
प्रतिमा अनावरण समारोह में मोदी ने कहा कि बगीचे, फव्वारे या टावर सौंदर्य के लिए होते हैं, लेकिन नायकों की मूृतियां जीवन दर्शन सिखाती हैं। ‘मंदिर की भांति वे राष्ट्र के प्रति निष्ठा जागृत करती हैं,’ उनका कथन आज भी प्रासंगिक है।
इस विश्वास को अमल में उतारते हुए हरिपुरा से डिजिटल ग्राम योजना आरंभ की, इंडिया गेट पर विशाल प्रतिमा स्थापित की, द्वीप का नाम नेताजी के नाम पर किया, पराक्रम दिवस घोषित किया, फाइलें खोलीं और लाल किले पर आईएनए प्रदर्शनी लगाई।
मोदी सरकार की ये नीतियां नेताजी के साहस और बलिदान को जीवंत करती हैं। राष्ट्रप्रेम की यह धारा नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही है, ताकि स्वराज का सपना साकार हो सके। इतिहास को संरक्षित रखना ही उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।