बिहार संगीत नाटक अकादमी ने प्रेमचंद रंगशाला में ‘कर्मयोगिनी माता अहिल्या’ महानाटक प्रस्तुत कर माता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती को यादगार बनाया। उपमुख्यमंत्री विजय सिंन्हा ने उनके चित्र पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी और कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सिंन्हा ने अहिल्याबाई को सनातन धर्म की शक्ति बताया, जो युवाओं को प्रेरित करती हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व से उनकी तुलना करते हुए कहा कि सेवा और संस्कृति का संदेश आज भी जीवंत है। नाटक स्वाभिमानी भारत निर्माण में योगदान देगा।
डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर, सीसीआरटी चेयरमैन ने कहा कि नाटक महान व्यक्तियों की गाथा को प्रभावी ढंग से पहुंचाता है। दुर्गावती और मीराबाई के बाद अहिल्या पर केंद्रित यह ऐतिहासिक नाटक कठिन परिस्थितियों में उनके संघर्ष को दर्शाता है। मंदिर निर्माण जैसे कार्यों ने उन्हें कर्मयोगिनी बनाया।
जानवी सिंह ने छोटी अहिल्या की नटखट भूमिका निभाई, जो कम उम्र की जिम्मेदारियों की मिसाल है। पांच शहरों में मंचन से उन्हें प्रेरणा मिली। शारा शर्मा ने बड़ी अहिल्या को गंभीरता से जीवंत किया, दुखों में भी एकता का संदेश दिया।
यह आयोजन अहिल्याबाई के जीवन दर्शन को नई रोशनी में प्रस्तुत करता है, जो समाज को एकजुट और समर्पित बनने का आह्वान करता है।