गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी ब्रिटिश राज के खिलाफ आदिवासी नायकों की वीरता की कहानी सुनाएगी। ‘वंदे मातरम् – स्वतंत्रता का उद्घोष’ थीम वाली यह झांकी देश के पहले आदिवासी डिजिटल म्यूजियम पर केंद्रित है, जो कर्तव्य पथ पर सबको आकर्षित करेगी।
प्रेस प्रीव्यू में सामने आई यह झांकी नवा रायपुर के उस डिजिटल संग्रहालय से ली गई है, जहां पीएम मोदी ने राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर 14 आदिवासी विद्रोहों की डिजिटल प्रस्तुति का लोकार्पण किया।
1910 के भूमकाल क्रांति के प्रणेता वीर गुंडाधुर झांकी के मुख्य आकर्षण हैं। धरवा योद्धा ने आम टहनियों व लाल मिर्च से विद्रोह का बिगुल फूंका, जिसने ब्रिटिशों को नागपुर से सिपाहियों के साथ भागना पड़ा, किंतु वे असफल रहे।
वीर नारायण सिंह, प्रदेश के पहले शहीद, घुड़सवार रूप में तलवार लिए प्रकट होंगे। अकाल में गरीबों की रक्षा कर उन्होंने 1857 संग्राम की नींव रखी।
एक माह की कड़ी मेहनत से विशेषज्ञों के अनुमोदन पर तैयार यह झांकी 17 राज्य प्रदर्शनों में शरीक होगी। यह आदिवासी समुदाय के अटल पराक्रम व राष्ट्रप्रेम को चिरस्मरणीय बनाएगी।