सुप्रीम कोर्ट में बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की कानूनी वैधता पर जोरदार बहस हुई। मतदाता सूची के इस पुनरीक्षण में नागरिकता जांच को लेकर याचिकाकर्ता सतर्क हैं। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई तीखे सवाल किए।
आयोग के पक्ष में राकेश द्विवेदी ने 2003 के नागरिकता कानून बदलाव को आधार बनाया, जो बिना विवाद स्वीकार हुआ था। बेंच ने पूछा, क्या यही SIR की नागरिकता जांच का कारण है? जवाब मिला कि अनुच्छेद 326 के तहत वोटरों की योग्यता सुनिश्चित करना प्राथमिक लक्ष्य है।
आदेश में उल्लिखित ‘माइग्रेशन’ की व्याख्या पर विवाद छिड़ा। कोर्ट ने जाना कि क्या यह अवैध सीमा घुसपैठ ही लक्ष्य है? आयोग ने अंतरराज्यीय व राज्य 内 प्रवासन को भी जोड़ा। अदालत ने असहमति जताई, कहा कि संवैधानिक अधिकारों से वैध माइग्रेशन को संदेहास्पद नहीं बनाया जा सकता।
अमेरिकी न्यायिक उदाहरण देकर याचिकाकर्ताओं ने प्रक्रियागत उल्लंघन का आरोप लगाया। द्विवेदी ने पलटकर अमेरिका की मिसालें दीं- ट्रंप की वेनेजुएला हस्तक्षेप और ग्रीनलैंड इरादे- जो ड्यू प्रोसेस की पोल खोलते हैं।
22 जनवरी की सुनवाई के बाद निर्णय आरक्षित। 28 जनवरी को आगे बहस। यह मामला बिहार के करोड़ों वोटरों के अधिकारों को सीधे प्रभावित करने वाला है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ सकता है।