सुप्रीम कोर्ट ने लाल किला आतंकी घटना के प्रमुख दोषी अशफाक की क्यूरेटिव याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया। यह विकास उस समय आया जब कोर्ट के एक ताजा फैसले ने पुरानी बंद फाइल को फिर खोल दिया। पहले की अपीलें खारिज हो चुकी हैं, फिर भी सुनवाई आगे बढ़ेगी।
पाकिस्तानी लश्कर आतंकी अशफाक को 2011 में मौत की सजा मिली थी। दया याचिका भी नामंजूर। 22 दिसंबर 2000 की उस रात लाल किले में लश्कर के छह हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की। शहीद हुए राइफलमैन उमा शंकर, नायक अशोक कुमार और अब्दुल्ला ठाकुर।
चार दिन बाद जामिया से अशफाक दंपति पकड़े गए। 21 नामजदों वाली चार्जशीट के बाद मुकदमे चले। 2005 का फैसला: अशफाक फांसी, पत्नी सात साल, कासिद भाइयों को आजीवन कारावास, बाकी तीनों को सात साल।
यह कदम आतंकी मामलों में क्यूरेटिव प्रावधानों की अहमियत रेखांकित करता है। पुलिस की प्रतिक्रिया से साफ होगा कि क्या सजा बरकरार रहेगी या बदलाव संभव है। देश आंखें बिछाए इंतजार कर रहा है।