बॉलीवुड में 12 घंटे की शूटिंग शिफ्टें अब बहस का केंद्र बनी हैं। फिल्ममेकर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इसे गंभीर समस्या करार देते हुए कहा कि क्रिएटिव क्षेत्र फैक्ट्री में तब्दील हो गया है। लंबे समय तक काम से कलाकारों की रचनात्मक क्षमता नष्ट हो रही है।
उन्होंने बताया कि मूंछ-दाढ़ी, विग और मेकअप साढ़े सात घंटे तो चल जाते हैं, उसके बाद ढीले पड़ने लगते हैं। मानसिक-शारीरिक थकान शाम तक हावी हो जाती है। पैसा बचाने की होड़ में प्रोडक्शन हाउस ज्यादा काम उगाहते हैं, जबकि श्रमिकों को अधिकारों का ज्ञान कम है।
उदाहरण स्वरूप, चित्रकार या गायक को 12 घंटे बिना रुके काम करने को कहें तो असंभव। शिफ्टें 13-14 घंटे तक बढ़ जाती हैं, मुंबई की दूरी जोड़कर 16 घंटे। सितारों पर हमेशा आकर्षक दिखने का दबाव अतिरिक्त पीड़ा देता है।
अपने संघर्ष साझा करते हुए अग्निहोत्री बोले, ‘शिफ्ट खत्म होते ही क्रिएटिविटी गायब, थकान हर तरफ।’ इंडस्ट्री के सभी पक्षकारों को विचार-विमर्श कर नियम बनाएं। लंबा काम न केवल सेहत बिगाड़ता है, बल्कि फिल्मों के स्तर को भी गिराता है। सुधार से ही स्वस्थ और उत्कृष्ट सिनेमा संभव है।