पश्चिम बंगाल के चर्चित एसएससी सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने 57.78 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर शिकंजा कस दिया। कोलकाता जोनल ऑफिस ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत विधायक जिबन कृष्ण साहा व प्रसन्न कुमार रॉय जैसे आरोपीयों की अचल संपत्तियां कुर्क कर लीं।
उत्तर 24 परगना के राजारहाट-न्यू टाउन से लेकर मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्धमान तक फैली ये संपत्तियां फ्लैट, विला व जमीन के रूप में हैं। कोलकाता के प्रमुख इलाकों में भी कुर्की हुई। जांच में पुष्टि हुई कि ये घोटाले की ‘काली कमाई’ से बनीं।
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई की दर्ज एफआईआर से शुरू ईडी जांच ने भर्ती प्रक्रिया की पोल खोल दी। ओएमआर में छेड़छाड़, इंटरव्यू में मनमानी व डेडलाइन के बाद फर्जी नियुक्तियां सामने आईं।
रॉय ने अपात्र उम्मीदवारों से भारी वसूली की, पैसे को शेल कंपनियों व बैंकों से घुमाकर प्रॉपर्टी में निवेश किया। साहा ने विभिन्न पदों पर रिश्वत संग्रह व उपयोग में अहम भूमिका निभाई। 2025 में उसके घर पर छापे के दौरान उसे दबोच लिया गया, परिवार की 3.01 करोड़ संपत्ति घोटाले से लिंक।
रॉय की पूर्व सहयोगी नीलिमा मंगल के नाम पर भी खरीदारी का खुलासा। रॉय गिरफ्तार व आरोपित हो चुका। कुल मिलाकर ईडी ने एसएससी घोटालों में 698 करोड़ की संपत्तियां फ्रीज कीं—247 करोड़ ग्रुप सी-डी, 238 करोड़ इसी केस व 154 करोड़ प्राइमरी में। यह कदम भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाएगा।