हरितकी या हरड़ को आयुर्वेद अमृत के समान मानता है। कारण? यह त्रिदोषहर (वात-पित्त-कफ नाशक) है और शरीर को समग्र रूप से सशक्त बनाती है। चरक संहिता इसका गुणगान करती है।
शरीर की आवश्यकता अनुसार कार्य करने वाली हरड़ कब्ज में विरेचक तो दस्त में स्तंभक बन जाती है। एडाप्टोजेनिक गुणों से युक्त यह जड़ी आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए वरदान है।
गैस्ट्रिक विकारों पर विजय पाने में निपुण हरड़ आम को नष्ट कर विषाक्त पदार्थ बाहर निकालती है। इससे त्वचा की चमक, बालों का स्वास्थ्य, नेत्र ज्योति और मुख रोगों में सुधार होता है।
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर हरड़ संक्रमणों से रक्षा करती है। सर्दी-जुकाम, बलगम, शिथिलता पर काबू पाती है। लीवर detox से ऊर्जा स्थिर रहती है।
रसायन औषधि के रूप में हरड़ दीर्घायु प्रदान करती है। सावधानी बरतें- अतिदोष से उच्छवास या शिथिलता संभव। गर्भिणी व कमजोर डॉक्टर सलाह लें।
प्राचीन ज्ञान की यह धरोहर स्वास्थ्य के नए द्वार खोलती है।