उत्तर प्रदेश मंत्री नरेंद्र कश्यप ने 21 जनवरी को लखनऊ से आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में ममता बनर्जी सरकार की पोल खोल दी। पीएम मोदी की मालदा रैली के बयानों का समर्थन करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ममता ने अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया और तुष्टिकरण की चक्की चलाई, जिससे बंगाल के हालात बदतर हो गए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह राजनीति लोकतंत्र की जड़ें हिला रही है और निर्दोष लोगों को संकट में डाल रही है। राज्य में फैली अस्थिरता इसी का प्रमाण है।
सपा को आड़े हाथों लेते हुए कश्यप ने यूपी के असफल गठबंधनों का जिक्र किया, जिसमें ‘दो लड़कों’ प्रयोग भी था। पीडीए को उन्होंने जमीनी आधारहीन बताया, जो सिर्फ चुनावी लाभ के लिए है।
उद्धव ठाकरे की बीएमसी हार पर बोलते हुए कश्यप ने कहा कि बालासाहेब के हिंदुत्व को छोड़ने का खामियाजा भुगतना पड़ा। जब तक बालासाहेब थे, शिवसेना हिंदुओं की आवाज थी।
बांग्लादेशी हिंदुओं पर हो रही हिंसा से व्यथित कश्यप ने वहां सरकार की असंवेदनशीलता पर सवाल उठाए। भारत की चेतावनियों पर अमल हो, ताकि अल्पसंख्यक सुरक्षित रहें।
दिग्विजय सिंह पर तंज कसते हुए उन्होंने विभाजन की जिम्मेदारी कांग्रेस-नेहरू पर डाली और आरएसएस को देशभक्त संगठन करार दिया। कश्यप के बयान राजनीतिक बहस को तेज करेंगे।