बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर बसंत पंचमी से पहले ही भक्तिमय माहौल में डूब गया है। मिथिलांचल के लाखों ‘ससुरालिए’ बाबा के दर्शन को पहुंच रहे हैं, जिससे ज्योतिर्लिंग क्षेत्र गुलजार हो उठा है।
पंचमी शुक्रवार को मां सरस्वती पूजा के साथ बाबा का तिलक उत्सव होगा। अभिषेक के बाद रंग-बिरंगे अबीर गुलाल से श्रद्धालु नाच-गान करेंगे। यह पर्व मिथिला की लोकमान्यता और देवघर की परंपरा का अनमोल संगम है।
पिछले वर्षों की तरह इस बार भी दो लाख भक्त आकांक्षी हैं। शिव-पार्वती की कथा से जुड़ी यह आस्था मिथिलांचल को बांधती है। महाशिवरात्रि पूर्व तिलक कर जल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
दरभंगा, पूर्णिया, कोसी, मुजफ्फरपुर, नेपाल तराई आदि से लाखों पहले ही डेरा डाले हैं। सड़क किनारे ठहरना उनकी रस्म है। सुल्तानगंज से पैदल कांवड़ लाते हुए वैवाहिक गीत गाते हैं।
भोग में खेत की बाली, शुद्ध घी। होली का आगमन। बाबा पर फुलेल, पुजारियों द्वारा तिलक। विवाह 25 दिन दूर। प्रशासन सतर्क: डीसी के निर्देश पर भीड़ प्रबंधन, सफाई, चिकित्सा, पेयजल सुनिश्चित।
आउट ऑफ टर्न दर्शन प्रतिबंधित, कूपन दरें बढ़ीं। आस्था का यह सैलाब अविस्मरणीय।