पर्यावरण के प्रति संवेदनशील अरावली श्रृंखला को बचाने हेतु सुप्रीम कोर्ट सक्रिय हो गया। कोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने व अवैध खनन गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाने के निर्देश दिए। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने राज्य सरकारों को तत्काल कार्रवाई का आदेश सुनाया।
बुधवार की सुनवाई में विशेषज्ञों वाली समिति गठन का ऐलान किया गया, जो न्यायालय की कड़ी नजर में अरावली पर रिपोर्ट तैयार करेगी। सदस्यों में क्षेत्रीय विशेषज्ञ शामिल होंगे और कार्य पूरी तरह कोर्ट निर्देशानुसार होगा।
राजस्थान किसानों के पक्ष से राजू रामचंद्रन ने पुराने कोर्ट आदेशों के बावजूद जारी खनन व कटाई की शिकायत की। बेंच ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए चिंता व्यक्त की तथा विनाशकारी प्रभावों से आगाह किया।
प्रशासन को संसाधन जुटाने को कहा गया। पक्षकारों से नाम सुझाव मांगे गए। वन क्षेत्र व अरावली सीमांकन अलग-अलग जांच के दायरे में। एमिकस क्यूरी को चार सप्ताह में विस्तृत नोट देने का समय मिला।
यह कदम अरावली को व्यापक खतरे से उबारने की दिशा में है, जो उत्तर भारत की पारिस्थितिकी के लिए अनिवार्य है। न्यायिक हस्तक्षेप से उम्मीदें बढ़ी हैं।