आठ वर्षों से गुमला की एक मासूम बच्ची का सुराग न लग पाने से झारखंड हाईकोर्ट में हड़कंप मच गया। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की बेंच ने बुधवार को चंद्रमुनि उराइन की याचिका सुनते हुए गृह सचिव को 27 जनवरी के लिए तलब किया। गुमला एसपी के बयान से स्पष्ट हुआ कि नई एसआईटी के प्रयासों के बावजूद दिल्ली तक की तलाश नाकाम रही।
कोर्ट ने बच्चों की तस्करी और घुमंतू समुदायों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े किए। राजस्थान से आने वाले ये लोग बिना किसी जांच के टेंट ठोकते हैं, पुलिस निष्क्रिय। गुलगुलिया गिरोह जैसे मामलों से साबित होता है कि तस्करी का जाल फैला है।
‘पुलिस पहचान-पत्र जांच क्यों नहीं करती? सरकार नियम क्यों नहीं बना रही?’—कोर्ट के ये सवाल राज्य तंत्र के लिए चुनौती हैं। परिवार की गुहारें अनसुनी रहीं, अब अदालत सक्रिय। अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने बचाव किया, किंतु बेंच ने नीतिगत सुधार और सख्ती पर जोर दिया।
यह केस झारखंड में बच्चों की सुरक्षा की पोल खोलता है। तस्करी रोकने हेतु तत्काल कदम उठाने होंगे, वरना और परिवार टूटेंगे।