अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के दौरान आईएएनएस से बातचीत में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया। सदनों के लंबे सत्र, विधायकों की भागीदारी और डिजिटल तकनीक आवश्यक हैं।
‘अधिक कार्यदिवसों से जनसमस्याओं का समाधान संभव है।’ सम्मेलन विधानसभाओं के प्रबंधन, अनुशासन पर केंद्रित है।
दो प्रमुख प्रस्ताव स्वीकार्य: विधानसभाओं के न्यूनतम सत्रदिन तय करना, जिससे प्रश्नकाल, विधायी कार्य मजबूत हों। साथ ही उपस्थिति बढ़ाकर संवाद संस्कृति, प्रशिक्षण और अध्ययन प्रवृत्ति को प्रोत्साहन।
सभी राज्यों में सत्रों की कमी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। 60 दिन आदर्श हैं, पर सहयोगी माहौल पर निर्भर। हंगामे नुकसानदेह। राजस्थान की सर्वदलीय पहल सफल हो रही।
गतिरोध के लिए सत्ता-विपक्ष नेताओं को स्पीकर कक्ष बुलाकर बातचीत। जनता के मुद्दे जल्द सुलझते हैं, रणनीतिक विवाद कठिन। संवाद सर्वोपरि।
पीठासीन अधिकारी के लिए निष्पक्षता चुनौती, राजनीतिक बदलावों से जटिल। चर्चा के अवसर बढ़ाएं, मर्यादा निर्धारित करें।
राजस्थान अग्रणी: पेपरलेस, आईपैड पर निर्भरता 80%, डिजिटल हस्ताक्षर, पूर्ण डिजिटलीकरण, 1952 से डिजिटल म्यूजियम, वक्तव्य का तत्काल डिजिटल रिकॉर्ड।
कर्तव्य पालन हो रहा, किंतु गहन लंबी बहसों से जनमानस की अपेक्षाएं पूरी होंगी।
लोक को संदेश: प्रतिनिधियों से जुड़ाव बनाए रखें। पूर्ण कार्यकाल जागरूकता से जवाबदेही स्वाभाविक रूप से मजबूत होगी।