आज ओडिशा के सतपड़ा से चिल्का झील में डॉल्फिन सर्वेक्षण की शुरुआत हुई। 18 प्रशिक्षित टीमें तीन दिनों तक इरावदी डॉल्फिन की संख्या का आकलन करेंगी। रामसर सूचीबद्ध यह झील भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि है, जो पुरी, खुर्दा व गंजाम में विस्तृत है।
मौसमानुसार इसका जलक्षेत्र 변ता है – वर्षा में विशाल, ग्रीष्म में संकुचित। पर्यटन केंद्र के रूप में डॉल्फिन सफारी, मछली उद्योग और पक्षी दर्शन यहां की पहचान हैं। इरावदी डॉल्फिन यहां की विशेषता हैं, जो ओडिशा के तटों पर अन्य प्रजातियों से अलग हैं।
वन्यजीव अधिकारी सौम्य रंजन साहू के अनुसार, सतपड़ा-बलूगांव में ट्रेनिंग के बाद टीमें जीपीएस युक्त नावों से ट्रांजेक्ट सर्वे पर निकलीं। पहले दिन सफल रहा। साहू ने पर्यटकों से सिंगल-यूज प्लास्टिक बंद करने और डॉल्फिनों को परेशान न करने को कहा।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की साध्वी सिंधुरा ने जोर दिया कि डॉल्फिनों की स्थिति झील की पारिस्थितिकी दर्शाती है। यह निगरानी स्थानीय आजीविका को मजबूत बनाएगी। आंकनों का विश्लेषण अभियान समाप्ति पर होगा।