प्रयागराज कुंभ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्राधिकरण के बीच टकराव चरम पर। आठ पेज के प्रतिवाद में स्वामी ने नोटिस को खारिज करते हुए वापसी की मांग की है। वकील ने 15 बिंदुओं पर प्राधिकरण के आरोपों का पुख्ता खंडन किया।
नोटिस को बदनाम करने की साजिश बताया गया, जो पूर्वाग्रह और भेदभाव से प्रेरित है। जगद्गुरु शंकराचार्य उपाधि के वैध उपयोग पर सवाल उठाने को गलत ठहराया।
जवाब में जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की वसीयत का उल्लेख है। 2021 की घोषणा और 2022 के भव्य पट्टाभिषेक से स्वामी की नियुक्ति सिद्ध हुई, जो गंगा आश्रम में लाखों की मौजूदगी में संपन्न हुआ।
गलत अफवाहों से स्वामी को भारी नुकसान हुआ—आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक। नोटिस हटाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।
कुंभ मेले के दौरान यह विवाद धार्मिक स्वायत्तता और प्रशासनिक हस्तक्षेप के मुद्दे को उजागर करता है। शांति पूर्ण समाधान की अपेक्षा।