दुनिया भर में तेज बदलावों के दौर में जर्मनी भारत को अपना प्रमुख साझेदार बना रहा है। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के अनुसार, भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
विशेषज्ञ विश्लेषण बताते हैं कि यह गठबंधन बाजार विस्तार, चीन से दूरी, हथियार बिक्री वृद्धि और तकनीकी सहयोग के फायदे लाता है। जर्मनी की 2024 रणनीति भारत की 2027 तक तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता पर दांव लगाती है, मध्यम वर्ग और डिजिटल प्रगति से प्रेरित।
द्विपक्षीय कारोबार 2025 में 35 अरब यूरो पार, 15% की छलांग। जर्मन निवेश 15.11 अरब डॉलर, 2000+ कंपनियां 4 लाख नौकरियां सृजित, ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, रिन्यूएबल्स में सक्रिय।
संभावित ईयू-भारत व्यापार समझौता 12% टैरिफ घटाकर 20 अरब यूरो अवसर खोलेगा। मर्ज यात्रा में 19 समझौते: रक्षा से हरित ऊर्जा तक।
रक्षा संबंध औद्योगिक साझे में परिवर्तित। घोषणा से संयुक्त उत्पादन, तकनीक साझा। थिसेनक्रुप को प्रोजेक्ट 75आई (5 अरब यूरो, 6 AIP पनडुब्बियां मझगांव के साथ) बड़ा ऑर्डर।
जर्मनी को निर्यात से लाभ, भारत को नौसेना मजबूती, रूस पर कम निर्भरता। 2020 हिंद-प्रशांत नीति को बल, चीन विरोधी लॉजिस्टिक्स से 90% व्यापार मार्ग सुरक्षित।
व्यापार आधारस्तंभ: जर्मनी भारत का टॉप ईयू पार्टनर (25%)। 50 अरब डॉलर+ कारोबार 2024-25 में—जर्मन एक्सपोर्ट 18.3 अरब (मशीनें, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन), भारत 10.54 अरब (फार्मा, ऑटो पार्ट्स)।
2030 तक 50 अरब यूरो लक्ष्य ‘इंडिया फर्स्ट’ से, मजबूत आपूर्ति से। दोनों देशों का भविष्य उज्ज्वल।