पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग ने सुभाष चंद्र बोस के पोते होने का दावा करने वाले चंद्र कुमार बोस पर निशाना साधा है। आयोग ने इसे गुमराह करने वाला बताते हुए सभी राजनीतिक दलों को सावधान किया है। आधिकारिक जांच में इन दावों की कोई सच्चाई नहीं पाई गई।
चुनावी हलचल के बीच यह विवाद गरमाया जब चंद्र कुमार ने अपनी वंशावली का हवाला देकर राजनीति में कदम रखा। आयोग ने तथ्यों की पड़ताल कर स्पष्ट किया कि नेताजी का परिवारिक वृक्ष प्रमाणित दस्तावेजों में अलग है।
सुभाष चंद्र बोस की वीरता और बलिदान की कहानी हर भारतीय के दिल में है। उनके नाम का राजनीतिकरण उनकी स्मृति का अपमान है। आयोग ने जोर देकर कहा कि चुनाव नीतियों और जनमुद्दों के लिए हैं, न कि असमर्थित दावों के लिए।
राज्य में चुनावी तारीखें नजदीक आ रही हैं। ऐसे में आयोग का हस्तक्षेप स्वागतयोग्य है। राजनीतिक दल अब बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे वास्तविक मुद्दों पर बहस करेंगे।
चंद्र कुमार के समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, लेकिन आयोग के फैसले पर कोई असर नहीं। इतिहासकारों का भी यही मत है कि नेताजी से जुड़े दावों की कसौटी प्रमाण हैं।
यह प्रकरण लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का उदाहरण है। बंगाल की जनता समझदार है, जो सच्चाई को महत्व देती है। नेताजी का सम्मान उनके विचारों को अपनाने से होगा, न कि झूठे दावों से।