तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई प्रदूषण मुक्ति की ओर बढ़ रही है। यहां 100 डिजिटल सेंसर बोर्ड लगाए जाएंगे, जो वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी सुनिश्चित करेंगे। यह कदम शहरवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
उन्नत तकनीक वाले ये सेंसर कणिकीय पदार्थ, गैसों और आर्द्रता का डेटा एकत्र करेंगे। क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म से विश्लेषण तुरंत होगा और जनता तक जानकारी पहुंचेगी। वर्तमान सीमित स्टेशनों की कमी को यह पूरा करेगा।
स्थापनास्थलों का चयन प्रदूषण मानचित्रण पर आधारित है। टी. नगर, अन्ना सालाई और बंदरगाह क्षेत्रों को विशेष ध्यान। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत टीएनपीसीबी संचालन संभालेगा।
शहरीकरण, 50 लाख से अधिक वाहन और पराली जलाने से चेन्नई का एक्यूआई असुरक्षित स्तर पर पहुंचा। अध्ययनों से सांस संबंधी बीमारियों में वृद्धि सामने आई, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में।
प्रोजेक्ट का समयबद्ध प्लान तैयार: चरणबद्ध स्थापना, 5 करोड़ से अधिक बजट, सोलर-पावर्ड यूनिट्स। राष्ट्रीय वायु सूचकांक से एकीकरण होगा। अन्ना यूनिवर्सिटी के प्रो. रवि कुमार ने कहा, ‘निगरानी से संकट टाला जा सकेगा।’
ओपन डेटा पॉलिसी से शोध और नीति निर्माण को बल मिलेगा। विश्वविद्यालयों और एनजीओ को डेटासेट उपलब्ध होंगे। चेन्नई का मॉडल अन्य महानगरों के लिए प्रेरणा बनेगा। यह प्रयास सतत विकास की दिशा में मजबूत इरादा दर्शाता है।