जम्मू-कश्मीर में जनवरी माह सूखे की चपेट में है। अपेक्षित वर्षा का महज 4 प्रतिशत ही प्राप्त हुआ, यानी 96 प्रतिशत की भारी कमी। शून्य से नीचे तापमान ने हालात और कठिन कर दिए हैं।
श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लद्दाख में यह माइनस 15 तक गिरा। सड़कों पर बर्फ जमी है, यातायात प्रभावित।
जेट स्ट्रीम की अनियमितता से नमी दूर रही। मौसम विज्ञानी राजेश कुमार ने कहा, ‘यह जलवायु परिवर्तन का संकेत है, पारंपरिक सर्दी बदल रही है।’
कृषकों को रबी फसलें खतरे में हैं। शोपियां के किसान अब्दुल रहमान बोले, ‘बागों को बर्फ की चादर चाहिए, वरना फसल नष्ट हो जाएगी।’
जलविद्युत परियोजनाओं से बिजली उत्पादन घटा, शहरों में कटौती। स्वास्थ्य विभाग ने सर्दी-जुकाम के मामलों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी।
अंतिम सप्ताह में हल्की बर्फबारी की संभावना है, लेकिन अभी शुष्कता बनी रहेगी। राज्य सरकार जल प्रबंधन और बीमा योजनाओं पर जोर दे रही है। यह मौसम चेतावनी है कि अनुकूलन की आवश्यकता है।