मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रदूषित जल आपूर्ति से उत्पन्न संकट ने राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आड़े हाथों लिया है।
सीएम यादव ने कहा कि सभी मौतें पानी की वजह से नहीं हुईं, बल्कि अन्य कारक भी हो सकते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक जांच पर जोर दिया। चतुर्वेदी ने इसे सरकार की लापरवाही का प्रमाण बताते हुए कटार्कति की। ‘मृतकों के परिजनों का अपमान है यह बयान,’ उन्होंने कहा।
पिछले सप्ताह से जलजनित बीमारियों से दर्जनों लोग प्रभावित हुए। पानी के सैंपल में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया। पुरानी पाइपलाइनों से सीवेज मिक्सिंग की समस्या आम है।
नागरिक टैंकरों पर आश्रित हैं, अस्पताल भरे पड़े हैं। विपक्ष ने प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मरम्मत कार्य तेज करने का ऐलान किया।
चतुर्वेदी की मुखरता ने मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया। भाजपा कार्यकर्ता इसका जवाब दे रहे हैं। यह टकराव जल प्रबंधन की कमियों पर बहस छेड़ रहा है।
शहरवासियों को तत्काल राहत चाहिए। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर ठोस कदम उठाने का समय है। साफ पानी हर नागरिक का अधिकार है।