लाहौल-स्पीति जिले में पशुओं पर हो रही क्रूरता को रोकने के लिए प्रशासन ने सक्रिय रुख अपनाया है। ऊंचे हिमालयी दर्रों के बीच आयोजित बैठक में सभी हितधारकों ने पशु संरक्षण के लिए एकसाथ कमर कसी। पर्यटन सीजन से पहले ये प्रयास सराहनीय हैं।
चर्चा में पशुओं पर भारी माल लादने, घायलों को इलाज न देने और प्रतिकूल मौसम में उनकी दुर्दशा प्रमुख रही। उपायुक्त की अध्यक्षता में जीपीएस ट्रैकिंग, मोबाइल वेट क्लिनिक और वजन मापने वाले यंत्र लगाने का निर्णय लिया गया।
किब्बर की रिन्चेन आंगमो जैसी महिलाओं ने घटनाओं का जिक्र कर सबको झकझोर दिया। चालान की राशि 50 हजार तक बढ़ाने और लाइसेंस अनिवार्य करने पर सहमति बनी। पशुपालन विभाग 2 करोड़ का फंड खोलेगा।
स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, हेल्पलाइन और सर्टिफाइड पर्यटन ट्रेल्स बनेंगे। जलवायु परिवर्तन के दौर में स्वस्थ पशु समुदाय की पूंजी हैं। ये कदम न केवल क्रूरता रोकेगा, बल्कि जिले की छवि भी निखारेगा। स्थानीय परंपराओं को सम्मान देते हुए आधुनिक समाधान अपनाए जाएंगे।