वृंदावन की गलियों में बसंत पंचमी का रंग चढ़ते ही एक मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है। यहां का गुप्त कक्ष केवल इस दिन ही श्रद्धालुओं के लिए खुलता है, जिसके दर्शन को विदेशों तक से लोग लोट-पोट हो जाते हैं।
यह मंदिर राधा-कृष्ण का भक्तिमय स्थल है। कक्ष के दरवाजे नक्काशीदार हैं, जो भगवान की लीलाओं को दर्शाते हैं। मान्यता है कि इसमें रखी वस्तुएं दिव्य शक्ति से युक्त हैं—सोने के आभूषण, पुरानी भजन पुस्तकें और अमर ज्योति।
उद्घाटन समारोह भव्य होता है। भजन-कीर्तन के बीच द्वार खुलते हैं तो भक्त भाव-विभोर हो उठते हैं। अमेरिका, यूरोप के साधक यहां आकर शांति का अनुभव करते हैं, सोशल मीडिया पर अपनी कहानियां साझा करते हैं।
दिन ढलते ही कक्ष बंद कर दिया जाता है। यह वार्षिक आयोजन भारत की सनातन परंपराओं को विश्व पटल पर लाता है, भक्तों को नई प्रेरणा देता है। वृंदावन का यह रहस्य सदैव कायम रहेगा।