महाराष्ट्र निकाय चुनावों के नतीजों ने विपक्ष को बैकफुट पर ला दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ते हुए बैलेट पेपर प्रणाली बहाल करने की जोरदार मांग उठाई। उनका कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक मशीनें विश्वासघात का कारण बन रही हैं।
थाने, नासिक, उल्हासनगर जैसे शहरों में महायुति ने शानदार प्रदर्शन किया। एमवीए को कुल सीटों का महज 10 प्रतिशत भी नहीं मिला। क्रॉस वोटिंग और बगावत ने कांग्रेस की कमर तोड़ दी।
विधान भवन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते पटोले भड़के। ‘ईवीएम काले डिब्बे हैं, जिनमें गड़बड़ी आसान है। बैलेट पेपर ही पारदर्शी वोटिंग का माध्यम हैं। चुनाव आयोग को आंखें खोलनी होंगी।’ उन्होंने वैश्विक उदाहरणों का हवाला दिया।
ईवीएम बहस पुरानी है। आयोग का दावा है कि ये मशीनें इंटरनेट से कटी हुईं हैं, इसलिए हैकिंग असंभव। विपक्ष वीवीपैट स्लिप की पूरी गिनती चाहता है। अदालतों में कई याचिकाएं लंबित हैं।
शिवसेना मंत्री दीपक केसकरकर ने पलटवार किया। ‘हार मान लो, बहाने मत बनाओ। जनता ने स्थिर सरकार चुनी।’ एनसीपी के अजित गुट ने भी एमवीए की आंतरिक कलह को हार का कारण बताया।
मतदाता व्यवहार में बदलाव साफ दिखा। स्वच्छ भारत, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और युवा भागीदारी ने महायुति को मजबूती दी। टर्नआउट 55 प्रतिशत रहा।
पटोले ने आरटीआई और हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की घोषणा की। राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता की अपील की। विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में ईवीएम विवाद राजनीतिक रंग ले सकता है। नई चुनावी जंग की शुरुआत हो चुकी है।