ऊधम सिंह नगर में गुलदार का कहर थम गया। काशीपुर में वन टीम ने रात के अंधेरे में इसे पिंजरे में काबू कर लिया। एक सप्ताह से अधिक समय से यह गुलदार आसपास घूम रहा था, जिसने किसानों के पशुओं को निशाना बनाया और पूरे इलाके में भय व्याप्त कर दिया।
घटना की शुरुआत खेतों में शिकार से हुई, जो धीरे-धीरे आबादी वाले इलाकों तक पहुंच गई। स्कूल बंद, बाजार सुबह ही सिमट गए। वन विभाग ने स्थानीय सहयोग से जाल बिछाया। थर्मल कैमरों से लोकेशन ट्रैक कर चारा लगाया गया। गुलदार जाल में फंसते ही पकड़ा गया।
गांववासी राजेश ने बताया, ‘रोज रात को दरवाजे बंद कर सोते थे। अब चैन की नींद आएगी।’ स्वस्थ गुलदार को वेट नर्सिंग के बाद शिफ्ट किया जाएगा। कारणों में आवास ह्रास और शिकार की कमी प्रमुख हैं।
उत्तराखंड में गुलदार घटनाएं बढ़ी हैं, खासकर टराई क्षेत्रों में। विभाग ने पिंजरे बढ़ाने, अलर्ट सिस्टम और मुआवजा नीति को मजबूत करने का वादा किया। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि रात में अकेले न घूमें और पशुओं को सुरक्षित रखें।
यह सफलता टीमवर्क का नतीजा है। लेकिन जंगलों की रक्षा न की गई तो संघर्ष जारी रहेगा। सरकार को इको-फ्रेंडली नीतियां अपनानी होंगी। काशीपुर अब शांत है, पर सतर्कता जरूरी बनी रहेगी।