कांग्रेस के कद्दावर नेता भीमन्ना नायक के आकस्मिक निधन से कर्नाटक राजनीति सन्नाटे में डूब गई। मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य नेताओं के शोक संदेशों ने उनके योगदान को रेखांकित किया।
खड़गे ने उन्हें ‘पार्टी के परिश्रमी योद्धा’ करार दिया, जबकि गांधी ने कहा कि नायक का समर्पण प्रेरणा स्रोत था। बिदर में बीमारी से उनका स्वर्गवास हुआ।
लंबे समय से विधानसभा में सक्रिय नायक ने ग्रामीण मुद्दों पर प्रभावी भूमिका निभाई। युवा कांग्रेस से प्रारंभ कर वे शीर्ष पदों तक पहुंचे।
सिद्धरमैया ने राज्य शोक की घोषणा की। भाजपा नेता भी संवेदना व्यक्त कर रहे। नायक की उत्तर कर्नाटक में व्यापक लोकप्रियता थी।
उनके नेतृत्व में कई आंदोलन सफल हुए, विशेषकर किसान हितों के। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में नेता शामिल होंगे।
परिवार को सांत्वना देते हुए पार्टी ने सहायता का वादा किया। शोक के बीच नायक के कार्यों की चर्चा जोरों पर है।
कांग्रेस कार्यकर्ता उनके नाम पर कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहे। यह घटना पार्टी एकता को मजबूत करने का अवसर बनेगी।
नायक की सादगी और मेहनत आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण है। कर्नाटक कांग्रेस उनके बिना आगे बढ़ने की राह तलाशेगी।