माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, जब पूरा दिन मौन, पूजा और दान में बीतता है। पितरों की आत्मा को संतुष्ट करने और पितृदोष दूर करने का यह सर्वोत्तम अवसर है। भक्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक बोलने से परहेज करते हैं।
सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें। फिर दर्भ, सफेद तिल और पिंड से श्राद्ध कर्म संपन्न करें। पुराणों में वर्णित अनुसार, इस तिथि पर किए कर्म लाख गुना फल देते हैं। दोषी ग्रहों का प्रभाव कम होता है।
अनाथों को भोजन, वृद्धों को वस्त्र और मंदिरों को घंटी-दीप दान करें। यह पुण्य कर्म वंश वृद्धि और सुख-समृद्धि लाता है। घर पर भी सरल पूजा से लाभ उठाएं।
मौनी अमावस्या हमें आंतरिक शांति का मार्ग दिखाती है। पारिवारिक एकता मजबूत होती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इस पावन दिन का सदुपयोग कर जीवन को धन्य बनाएं।