उत्तर प्रदेश में कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज की पुण्यतिथि पर स्मृति सभा का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत तमाम नेताओं ने उन्हें नमन किया।
योगी सरकार ने इस अवसर को सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया। सीएम ने कहा, ‘बिरजू महाराज ने लखनऊ घराने को विश्व पटल पर पहचान दिलाई।’ उन्होंने उनके नाम पर कथक अकादमियों की स्थापना का ऐलान किया।
केशव मौर्य ने लखनऊ में विशेष कथक सम्मेलन का आयोजन किया। बिरजू महाराज के शिष्यों ने ‘काहे चेड़ मोहे’, ‘दोला यात्रा’ जैसे प्रसिद्ध नृत्यों की प्रस्तुति दी।
यह महान कलाकार कलका-बिंदा वंश परंपरा के आखिरी प्रमुख प्रतिनिधि थे। उनके दादा कालका प्रसाद और बिंदा प्रसाद ने नवाब वाजिद अली शाह के दरबार में कायम किया था।
बिरजू महाराज सिर्फ नर्तक ही नहीं, संगीतज्ञ भी थे। उनकी राग आधारित थुमरियां कथक को नया आयाम देती हैं। ‘मोहे पंघट पे नंदलाल’ जैसी रचनाएं अमर हैं।
फिल्म जगत में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। सत्यजीत राय से लेकर संजय लीला भंसाली तक ने उनके नृत्य को अपनाया। छोटे पर्दे पर दूरदर्शन के ‘कथक’ कार्यक्रम ने उन्हें घर-घर पहुंचाया।
आज आयोजित कार्यक्रमों में उनके जीवन पर डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। साहित्यकारों ने उनकी कला पर लेख पढ़े। युवा कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए पुरस्कार वितरित किए गए।
उत्तर प्रदेश सरकार का संकल्प है कि बिरजू महाराज की परंपरा को जीवंत रखा जाए। कथक महोत्सवों का विस्तार होगा और डिजिटल लाइब्रेरी बनाई जाएगी।
जैसे चरकुला घूमता था वैसे ही उनकी कला आज भी घूम रही है। हर चक्कर में उनकी थाप, हर तुकड़े में उनकी लय बसी है। बिरजू महाराज अमर रहेंगे।