मध्य प्रदेश में भागीरथपुरा जल संकट ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने शिवराज सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सभी जांच रिपोर्टें जनता के समक्ष लाने का निर्देश दिया है। उन्होंने इसे सत्ता का घोर अन्याय करार दिया।
भोपाल के इस घनी आबादी वाले इलाके में पानी में मिले जहर ने घर-घर को सताया। लोग सड़कों पर लोटने लगे, अस्पतालों में बेडों की कमी हो गई। मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
सार्वजनिक सभा में सिंह ने गरजते हुए कहा, ‘रिपोर्टें छिपाकर सरकार जनता को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है। तुरंत जारी करें, वरना आंदोलन होगा।’ उन्होंने बीजेपी शासनकाल की विफलताओं को गिनाया।
जांच में बैक्टीरिया और भारी धातुओं की मौजूदगी पाई गई, जो सीवर और फैक्ट्रियों से आया। नगरपालिका की लापरवाही सुर्खियों में है। सिंह ने आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। एनजीओ राहत कार्य कर रहे हैं, लेकिन मूल समस्या जस की तस है। पीड़ितों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
मानसून से पहले जल प्रबंधन सुधार जरूरी है। सिंह की मांग ने विपक्ष को मजबूती दी है। सरकार यदि टालमटोल करेगी तो परिणाम भुगतेगी। पारदर्शिता ही विश्वास बहाल कर सकती है।