गौतमबुद्धनगर के जिला आबकारी अधिकारी को शराब कारोबार में ओवररेटिंग के आरोप में उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह सख्त कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ निरंतर जंग का हिस्सा है।
शराब दुकानों के लाइसेंस नवीनीकरण और आवंटन में अधिकारियों द्वारा मनमानी दरें लगाने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। जांच में पाया गया कि आधिकारिक शुल्क से दोगुनी रकम वसूली जा रही थी, जो सीधे सरकारी खजाने को चूना लगा रही थी।
आबकारी विभाग ने गुप्त जांच के बाद निलंबन आदेश जारी किया। अधिकारी को मुख्यालय से जोड़ा गया है और पूर्ण जांच चल रही है। यदि दोषी पाए गए तो विभागीय या आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।
यूपी में आबकारी राजस्व करोड़ों में है, जो विकास योजनाओं का आधार है। ऐसी कार्रवाइयां विभाग की छवि सुधारने और ईमानदार व्यापार को बढ़ावा देंगी। भविष्य में डिजिटल सिस्टम से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा। सरकार का संदेश साफ है- भ्रष्टाचार के प्रति कोई नरमी नहीं।