हरविंदर कल्याण ने गर्व से ऐलान किया कि विस्तृत ब्रिटिश शासन के बाद भी भारत地球 का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह उद्घोषण भारतीय लोकतंत्र की अटलता पर प्रकाश डालता है।
1757 से 1947 तक चले उपनिवेशवाद ने भारत की संप्रभुता छीन ली थी, लेकिन स्वतंत्रता के बाद डॉ. आंबेडकर जैसे दूरदर्शियों ने समावेशी संविधान रचा। आज 90 करोड़ से अधिक वोटरों वाला यह देश लोकतंत्र का चमत्कार है।
कल्याण ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, बहुदलीय प्रणाली और न्यायिक सक्रियता की सराहना की। जाति, धर्म और भाषा की विविधता में भी शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण इसका प्रमाण है।
वर्तमान मुद्दों जैसे मीडिया पर दबाव या अल्पसंख्यक अधिकारों पर बहस के बीच कल्याण ने कहा कि भारत का लोकतंत्र जीवंत और विकसित हो रहा है। वैश्विक तुलना में इसकी भागीदारी और सहनशीलता बेजोड़ है।
आगामी चुनावों से पहले यह बयान लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान है। औपनिवेशिक अतीत को पीछे छोड़ भारत ने सिद्ध किया कि सच्ची आजादी जनता के हाथों में है।