पad्म भूषण से सम्मानित संगीतकार एआर रहमान ने हिंदी फिल्म जगत को ‘कम्युनल’ बताकर विवाद खड़ा कर दिया। हरिद्वार में संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें ‘जिहादी’ करार दिया।
एक पॉडकास्ट में रहमान ने कहा कि बॉलीवुड की स्क्रिप्टें धार्मिक स्टीरियोटाइप्स को हवा दे रही हैं। ‘यह कम्युनल दिशा में बढ़ रहा है, जो चिंताजनक है,’ उन्होंने चेतावनी दी।
संतों ने अखाड़ों की बैठक बुलाकर रहमान की निंदा की। ‘जिहादी प्रचार के जरिए सांस्कृतिक हमला,’ एक महंत ने कहा। हरिdvार में धरना और मुंबई में नारेबाजी हुई।
रहमान के रोजा, लगान जैसे धुनें अमर हैं। प्रशंसक उन्हें सुधारवादी मानते हैं, जबकि आलोचक पाखंड बताते हैं। न्यूज चैनलों पर बहस छिड़ी हुई है।
यह टकराव सिनेमा और समाज के रिश्ते को उजागर करता है। क्या रहमान का बयान बदलाव लाएगा? आने वाले दिन बताएंगे।