राज्य विधानसभा के स्पीकर ने बीआरएस विधायकों के खिलाफ दायर दो अयोग्यता याचिकाओं को दरकिनार कर दिया। कांग्रेस की इस कोशिश को नाकाम करते हुए गद्दम प्रसाद ने पी कौशिक रेड्डी और जी महिपाल रेड्डी को क्लीन चिट दे दी। राज्य की उथल-पुथल भरी राजनीति में यह कदम विपक्ष के हौसले बुलंद कर रहा है।
मामला लोकसभा चुनावों से जुड़ा है, जहां इन विधायकों पर कांग्रेस के प्रति झुकाव का आरोप लगा। याचिकाकर्ताओं ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की। लंबी सुनवाई प्रक्रिया में साक्ष्य जुटाए गए, जिसमें सार्वजनिक बयान और वीडियो शामिल थे।
फैसले में स्पीकर ने कहा कि दल-बदल के लिए ठोस प्रमाण आवश्यक हैं, जो यहां अनुपस्थित हैं। उन्होंने जोर दिया कि चुनावी समर्थन व्यक्तिगत राय हो सकती है, लेकिन विधायी विश्वासघात नहीं। बीआरएस ने इसे ‘लोकतांत्रिक न्याय’ करार दिया, जबकि कांग्रेस ने पक्षपात का आरोप लगाया।
पिछले महीने भी इसी तरह की एक याचिका खारिज हो चुकी है। यह घटनाक्रम दल-बदल कानून की सीमाओं को रेखांकित करता है। तेलंगाना में सत्ता-सिंहासन की जंग तेज होने के बीच यह फैसला विधानसभा की संरचना को स्थिर रखेगा। भविष्य में ऐसे मामलों पर अदालतों की भूमिका बढ़ सकती है।