हरिद्वार के हर की पौड़ी पर मकर संक्रांति की धूम छाई रही। कड़ाकी की ठंड के बावजूद असंख्य भक्त गंगा स्नान को पहुंचे, आस्था की लहरें घाट को भरती रहीं।
फसल उत्सव के रूप में प्रसिद्ध यह पर्व उत्तर भारत में विशेष महत्व रखता है। तिल-गुड़ वितरण और उड़्डयन के साथ-साथ गंगा में डुबकी प्रमुख आकर्षण रही। साधु-संतों का भी भारी जमावड़ा देखने को मिला।
नगर निगम और जिला प्रशासन ने बेहतरीन इंतजाम किए। भक्तों के लिए गर्म चाय-पकवान, कंबल और एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई। ‘यह स्नान जीवन के सभी कष्ट हर लेता है,’ बोले उत्तर प्रदेश से पधारे एक यात्री।
रात्रि में गंगा आरती का नजारा अद्भुत था। हजारों दीये नदी में विसर्जित होकर ज्योतिर्लिंग की तरह चमके। पर्यावरण प्रेमियों ने प्लास्टिक मुक्त स्नान का संदेश दिया।
मकर संक्रांति स्नान आगे भी जारी रहेगा। हरिद्वार की यह परंपरा देश की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करती है, जहां भक्ति सर्दी पर भारी पड़ती है।