खिचड़ी पर्व की पूर्व संध्या पर गोरखनाथ मंदिर भक्तिमय माहौल में डूब गया। भोर साढ़े चार बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। बिहार, नेपाल से भी तीर्थयात्री पहुंचे, मंदिर को रंग-बिरंगे चादरों से सजाया गया।
नाथ परंपरा का यह प्रमुख पर्व खिचड़ी भोग पर केंद्रित है। किंवदंती है कि स्वयं गोरखनाथ जी ने इस प्रसाद को आशीर्वाद दिया। मंदिर ने सुबह चार बजे द्वार खोले, लेकिन तब तक दस हजार से अधिक भक्त मौजूद थे। आरती टिकट और विशेष दर्शन की व्यवस्था तेजी से चली।
‘बाबा का आह्वान है, हम सब आ गए,’ बोले लखनऊ से आए यात्री। सामूहिक भोजनालयों में टन भर खिचड़ी तैयार हो रही, सबको मुफ्त वितरित। स्वास्थ्य शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित। पुलिस ने ड्रोन से निगरानी बढ़ाई।
जिला प्रशासन ने वरिष्ठ अधिकारी तैनात किए। कल मुख्य प्रसाद वितरण होगा, जिसमें हेलीकॉप्टर से फूल बरसाने की योजना। रंगोली, नाथ पंथी गीत माहौल को और भक्तिमय बना रहे।
यह सैलाब न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक। परिवार प्रसाद लेकर लौटे, आशाओं से भरे। गोरखनाथ की ज्योति सदैव जलती रहेगी।