मंदिरों की संपत्तियों पर अवैध कब्जों से निपटने के लिए केरल हाईकोर्ट ने सरकार को नया कानून बनाने का निर्देश जारी किया है। यह कदम देवास्वोम बोर्डों की नाकामी के बाद आया, जिनके कारण राज्य के प्राचीन मंदिरों की बहुमूल्य जमीनें लुप्त हो रही हैं।
विभागीय बेंच ने 1,500 एकड़ से अधिक भूमि के नुकसान का उल्लेख किया, जिसमें सबरीमाला और कोचीन क्षेत्र शामिल हैं। जजों ने केरल लैंड एंक्रोचमेंट एक्ट की कमियों को रेखांकित करते हुए जीपीएस मैपिंग, टास्क फोर्स और त्वरित अदालतों का सुझाव दिया।
पीआईएल में भक्तों ने ऐतिहासिक स्थलों पर किसानों और बिल्डरों द्वारा कब्जे की शिकायत की। कोर्ट ने आगे आवंटन रोके और मार्च तक राज्यव्यापी ऑडिट का आदेश दिया।
राजनीतिक दलों के बीच बहस छिड़ गई है। विपक्ष ने इसे आस्था की जीत बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने सुधारों का वादा किया।
यह कानून पारदर्शिता लाएगा और मंदिर राजस्व से लाखों तीर्थयात्रियों को लाभ पहुंचाएगा। केरल का यह प्रयास धार्मिक ट्रस्टों की सुरक्षा में नया अध्याय जोड़ेगा, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा बनेगा।