स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में झारखंड अपनी मेगालिथिक धरोहर के साथ धूम मचाने को तैयार है। राज्य की ये प्रागैतिहासिक संरचनाएं वैश्विक नेताओं के बीच चर्चा का विषय बनेंगी।
रांची, हजारीबाग और सिंहभूम जैसे जिलों में फैले ये मेगालिथिक अवशेष लौह युगीन समाजों की उन्नत तकनीक दर्शाते हैं। ये संरचनाएं खगोलीय गणनाओं और सामुदायिक अनुष्ठानों से जुड़ी हैं।
दावोस में हाई-टेक पवेलियन होगा, जिसमें होलोग्राम, डिजिटल रिकंस्ट्रक्शन और विशेषज्ञ सत्र शामिल हैं। यह प्रयास विरासत संरक्षण, अनुसंधान और पर्यटन विकास के लिए साझेदारियां जुटाएगा।
मुख्य सचिव ने बताया, ‘ये साइटें ग्रामीण विकास का आधार बन सकती हैं।’ सम्मेलन के सतत विकास थीम से मेल खाते हुए, यह प्राचीन ज्ञान को आधुनिक चुनौतियों से जोड़ेगा।
झारखंड के आदिवासी समुदायों के लिए यह सांस्कृतिक गौरव और रोजगार का अवसर है। दावोस से लौटकर ये मेगालिथिक चिह्न नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।